| विसर्जन |
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| मित्रा...आज
बाप्पाला आणलेस तू घरात |
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| वाजत
गाजत ...हर्षोल्हासात . |
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| पण
घरातील बापाला |
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| अनाथाश्रमात
का पाठवलेस तू ..? |
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| गुपचूप... |
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| एखादी
टाकावू वस्तू फेकून द्यावे तसे. |
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| हि
कुठली तुझी श्रद्धा ? |
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| हि
कुठली तुझी भक्ती? |
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| मित्रा
घरात बसविलेल्या बाप्पाच्या डोळ्यात डोकाव जरा |
| मग तुला दिसेल |
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| तुझे
सारे कर्म... |
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| तुझी
बेगडी भक्ती ... |
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| अरे
आज वाटतोयस तू पेढ्यांचा प्रसाद |
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| सा-या
गावाला...मोठ्या अभिमानाने. |
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| पण
स्वत:च्या बापाला |
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| दोन
घासासाठी तळमळवताना |
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| काहीच
कसे वाटले नाही तुला..? |
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| आज
मोठ्या दिमाखात बाप्पासाठी |
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| तू
महागाचे मखर घेवून आलास. |
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| अन
तेंव्हा बापाला अंथरायला |
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| काय
दिले होतेस तू ? |
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| एक
फाटके पोते..? |
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| मित्रा
हल्ली तुझ्या घरात बाप्पाला |
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| चुकल्यासारखे
वाटतेय... |
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| अनाथाश्रमात
धाय मोकलून रडणा-या |
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| तुझ्या
बापासाठी |
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| गणपतीबाप्पाचेही
काळीज तुटतेय... |
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| घरात
गणपतीबाप्पाची प्राणप्रतिष्ठापना करणा-या |
| माझ्या
मित्रा, |
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| अनाथाश्रमात
स्वतःच्या बापाचे विसर्जन करून |
| अखेर
काय साधलेस तू..? |
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| उत्तम सदाकाळ |
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| 9011016655 |
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